West Bengal Lockdown: पश्चिम बंगाल में 9 जुलाई से नई शर्तों के साथ लॉकडाउन, 'दीदी' का आदेश

हाइलाइट्स: पश्चिम बंगाल सरकार ने मंगलवार को लॉकडाउन के तहत आने वाले क्षेत्र के दायरे में विस्तार करने का लिया निर्णय कोविड-19 के मामलों में बेतहाशा वृद्धि को काबू करने के मद्देनजर नौ जुलाई से कड़े प्रतिबंध लागू करेगी पश्चिम बंगार सरकार सरकार के इस फैसले से राज्य के कंटेनमेंट जोन और बफर जोन में सख्त लॉकडाउन रहेगा कोरोना वायरस का संक्रमण (Coronavirus in West Bengal) देश भर में तेजी से फैल रहा है। ऐसे में पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने 9 जुलाई को शाम 5 बजे से लॉकडाउन (Lockdown in West Bengal) लगाने के आदेश जारी किए हैं। सरकार के इस फैसले से राज्य के कंटेनमेंट जोन और बफर जोन में सख्त लॉकडाउन रहेगा। पश्चिम बंगाल सरकार (West Bengal Govt) में अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) अलापन बंदोपाध्याय की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि ये व्यापक कंटेनमेंट जोन सख्त लॉकडाउन के अधीन होंगे और सभी सरकारी एवं निजी कार्यालय, सभी गैर आवश्यक गतिविधियां, समारोह, परिवहन, सभी बाजार, औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियां बंद रहेंगी। हालांकि, इसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया कि लॉकडाउन के यह ताजा निर्देश कब तक लागू रहेंगे। वहीं, लॉकडाउन का वर्तमान चरण 31 जुलाई तक लागू है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कोविड-19 के मामलों में बेतहाशा वृद्धि को काबू करने के मद्देनजर नौ जुलाई से कड़े प्रतिबंध लागू किए जाएंगे। अधिकारी ने बताया कि कंटेनमेंट जोन और इसके आसपास के बफर जोन को एक साथ मिलाकर ''व्यापक आधार'' वाला कंटेनमेंट जोन बनाया जाएगा, जहां गुरुवार शाम पांच बजे से संपूर्ण लॉकडाउन लागू किया जाएगा। अधिकारी ने कहा कि स्थानीय प्रशासन इन इलाकों के निवासियों के लिए आवश्यक सामानों की सप्लाई उपलब्ध कराने का प्रयास करेगा। पढ़े-लिखे लोगों में ज्यादा फैला कोरोना ऊंची ऊची इमारतों और पक्के मकानों में रहने वाले पढ़े-लिखे लोगों की लापरवाही से कोलकाता में हाल ही Covid-19 के मामले तेजी से बढ़े हैं। इसके चलते पश्चिम बंगाल सरकार ने फिर लॉकडाउन लगाने का फैसला किया है। कोलकाता नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि पिछले दो सप्ताह में इस महानगर में कोरेाना वायरस से जितने लोग संक्रमित पाये गये हैं उनमें 85 फीसदी ऐसे हैं जो पढ़े-लिखे हैं और हाउसिंग कॉम्प्लेक्स, अपार्टमेंट या पक्के मकानों में रहते हैं जबकि 15 फीसद झुग्गी बस्ती इलाके से हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पढ़े-लिखे और जिम्मेदार लोगों से इस वायरस के प्रसार को रोकने की योजना को लागू करने में प्रशासन की मदद की उम्मीद की जाती है लेकिन उसके विपरीत वे सहयोग नहीं कर रहे हैं।

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